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mahabharat 14.109.d46: जो ब्राह्मण इस पापनाशक व्रत को करता है, वह मन से शुद्ध और सूर्य के समान तेजस्वी हो जाता है तथा स्वर्ग को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d46 
यथोक्तमेतद् य: कुर्याद् द्विज: पापप्रणाशनम्।
स दिवं याति पूतात्मा निर्मलादित्यसंनिभ:॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण इस पापनाशक व्रत को करता है, वह मन से शुद्ध और सूर्य के समान तेजस्वी हो जाता है तथा स्वर्ग को प्राप्त करता है।
 
The Brahmin who performs this aforementioned sin-destroying fast, becomes pure at heart and radiant like the clear Sun and attains heaven.
 
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)


 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)