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mahabharat 14.109.d45: हे पाण्डुपुत्र! प्राचीन काल में ऋषियों ने आत्मशुद्धि के लिए इस व्रत को किया था। यह पुण्यदायी और समस्त प्राणियों को पवित्र करने वाला कहा गया है।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d45 
एतत् पुरा विशुद्धॺर्थमृषिभिश्चरितं व्रतम्।
पावनं सर्वभूतानां पुण्यं पाण्डव चोदितम्॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! प्राचीन काल में ऋषियों ने आत्मशुद्धि के लिए इस व्रत को किया था। यह पुण्यदायी और समस्त प्राणियों को पवित्र करने वाला कहा गया है।
 
O son of Pandu! In ancient times, the sages had performed this fast for self-purification. It is said to be virtuous and purifies all beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)