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mahabharat 14.109.d44: यदि कोई ब्राह्मण रजस्वला स्त्री, कुत्ते या चांडाल के द्वारा देखे जाने पर भोजन करता है, तो उस ब्राह्मण को चान्द्रायण व्रत करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d44 
उदक्यया शुना वापि चाण्डालैर्वा द्विजोत्तम:।
दृष्टमन्नं तु भुञ्जानो द्विजश्चान्द्रायणं चरेत्॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई ब्राह्मण रजस्वला स्त्री, कुत्ते या चांडाल के द्वारा देखे जाने पर भोजन करता है, तो उस ब्राह्मण को चान्द्रायण व्रत करना चाहिए।
 
If a Brahmin eats food after being seen by a menstruating woman, a dog or a Chandala, then that Brahmin should observe Chandrayaan fast.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)