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mahabharat 14.109.d40: जो द्विज एकोद्दिष्ट श्राद्ध का अन्न खाता है तथा बहुत से लोगों की भीड़ में भोजन करता है तथा टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन करता है, उसे चान्द्रायण-व्रत का पालन करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d40 
एकोद्दिष्टं तु यो भुङ्‍क्ते जनमध्यगतोऽपि य:।
भिन्नभाण्डेषु यो भुङ्‍क्ते द्विजश्चान्द्रायणं चरेत्॥
 
 
अनुवाद
जो द्विज एकोद्दिष्ट श्राद्ध का अन्न खाता है तथा बहुत से लोगों की भीड़ में भोजन करता है तथा टूटे-फूटे बर्तनों में भोजन करता है, उसे चान्द्रायण-व्रत का पालन करना चाहिए।
 
The Dwija who eats the food of Ekoddishta Shraddha and eats in a crowd of many people and eats in broken utensils, he should observe Chandrayaan-Vrat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)