श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन  »  श्लोक d32-d33
 
 
श्लोक  14.109.d32-d33 
ब्रह्महत्या च गोहत्या सुवर्णस्तैन्यमेव च।
भ्रूणहत्या सुरापानं गुरोर्दारव्यतिक्रम:॥
एवमन्यानि पापानि पातकीयानि यानि च।
चान्द्रायणेन नश्यन्ति वायुना पांसवो यथा॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण और गौ हत्या, स्वर्ण चोरी, भ्रूण हत्या, मद्यपान, गुरुपत्नी के साथ व्यभिचार आदि सभी पाप चान्द्रायण व्रत करने से उसी प्रकार नष्ट हो जाते हैं, जैसे वायु के वेग से धूल नष्ट हो जाती है।
 
All the sins like killing a brahmin, cow, theft of gold, killing an embryo, drinking alcohol, adultery with the wife of his Guru and many other sins are destroyed by observing the Chandrayan fast in the same manner as dust is destroyed by the force of wind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)