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mahabharat 14.109.d31: चान्द्रायण व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप सूखी लकड़ी की तरह तुरंत जलकर राख हो जाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d31 
चान्द्रायणेन चीर्णेन यत् कृतं तेन दुष्कृतम्।
तत् सर्वं तत्क्षणादेव भस्मीभवति काष्ठवत्॥
 
 
अनुवाद
चान्द्रायण व्रत करने से मनुष्य के सभी पाप सूखी लकड़ी की तरह तुरंत जलकर राख हो जाते हैं।
 
By observing Chandrayaan fast, all the sins of a person are immediately burnt to ashes like dry wood.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)