Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.109.d27: चान्द्रायण व्रत करने वाले व्यक्ति के लिए प्रतिदिन तीन बार, दो बार अथवा एक बार स्नान करने का विधान है। उसे सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा तर्पण से पूर्व अपने वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए। | mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्रिकालं स्नानमस्योक्तं द्विकालमथवा सकृत्।
ब्रह्मचारी सदा वापि न च वस्त्रं प्रपीडयेत्॥
अनुवाद
चान्द्रायण व्रत करने वाले व्यक्ति के लिए प्रतिदिन तीन बार, दो बार अथवा एक बार स्नान करने का विधान है। उसे सदैव ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा तर्पण से पूर्व अपने वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए।
For the person observing Chandrayaan fast, there is a provision to take bath thrice, twice or even once every day. He should always remain celibate and should not squeeze his clothes before offering tarpan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥