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mahabharat 14.109.d18: सात ब्राह्मणों के घर जाकर भिक्षा मांगो, परन्तु सात से अधिक घरों में मत जाओ। किसी द्वार पर खड़े होकर भिक्षा की प्रतीक्षा उतनी ही देर तक करो जितनी देर गाय का दूध निकालने में लगती है। मौन रहो और अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखो।   |   mahabharat अध्याय 14.109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.109.d18 
ब्राह्मणानां गृहाणां तु सप्तानां नापरं व्रजेत्।
गोदोहमात्रं तिष्ठेत् तु वाग्यत: संयतेन्द्रिय:॥
 
 
अनुवाद
सात ब्राह्मणों के घर जाकर भिक्षा मांगो, परन्तु सात से अधिक घरों में मत जाओ। किसी द्वार पर खड़े होकर भिक्षा की प्रतीक्षा उतनी ही देर तक करो जितनी देर गाय का दूध निकालने में लगती है। मौन रहो और अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण रखो।
 
Go to the houses of seven Brahmins and beg for alms, but do not go to more than seven houses. Stand at a door and wait for alms for the same time as it takes to milk a cow. Remain silent and control your senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)