श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 109: चान्द्रायण-व्रतकी विधि, प्रायश्चित्तरूपमें उसके करनेका विधान तथा महिमाका वर्णन  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  14.109.d15 
ततो मध्याह्नकाले वै पायसं यावकं हि वा।
पाचयित्वा प्रयत्नेन प्रयत: सुसमाहित:॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद शुद्ध एवं एकाग्र मन से दोपहर के समय खीर या जौ का दलिया सावधानीपूर्वक तैयार करें।
 
Thereafter, with a pure and concentrated mind, carefully prepare Kheer or Barley porridge during the afternoon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)