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mahabharat 14.107.d7: यदि विदेश में रहने वाला कोई पुरुष कुछ समय के लिए घर आता है, तो वह अपनी पत्नी के साथ उसके मासिक धर्म के दौरान या उसके अलावा किसी भी समय, रात में या दिन में संभोग करता है, तो उसे प्रायश्चित का दायित्व नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d7 
अनृतावृतुकाले वा दिवा रात्रौ तथापि वा।
प्रोषितस्तु स्त्रियं गच्छेत् प्रायश्चित्तीयते न च॥
 
 
अनुवाद
यदि विदेश में रहने वाला कोई पुरुष कुछ समय के लिए घर आता है, तो वह अपनी पत्नी के साथ उसके मासिक धर्म के दौरान या उसके अलावा किसी भी समय, रात में या दिन में संभोग करता है, तो उसे प्रायश्चित का दायित्व नहीं है।
 
If a man living abroad comes home for some time, he is not liable for atonement if he has sexual intercourse with his wife during her menstrual period or at any time other than that, at night or during the day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)