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mahabharat 14.107.d61: क्योंकि जो व्यक्ति आरोप लगाता है उसका पुण्य उस पर चला जाता है जिस पर आरोप लगाया जाता है और उसका पाप उस पर चला जाता है जो आरोप लगाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d61 
शपता यत् कृतं पुण्यं शप्यमानं तु गच्छति।
शप्यमानस्य यत् पापं शपन्तमनुगच्छति॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि जो व्यक्ति आरोप लगाता है उसका पुण्य उस पर चला जाता है जिस पर आरोप लगाया जाता है और उसका पाप उस पर चला जाता है जो आरोप लगाता है।
 
Because the virtue of the person who accuses goes to the one who is accused and his sin goes to the one who accuses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)