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mahabharat 14.107.d56: जो छह अंगों वाले वेदों को पढ़ाता है, वैदिक व्रतों को पढ़ाता है और मंत्रों के अर्थ समझाता है, उसे आचार्य कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d56 
साङ्गांश्च वेदानध्याप्य शिक्षयित्वा व्रतानि च।
विवृणोति च मन्त्रार्थानाचार्य: सोऽभिधीयते॥
 
 
अनुवाद
जो छह अंगों वाले वेदों को पढ़ाता है, वैदिक व्रतों को पढ़ाता है और मंत्रों के अर्थ समझाता है, उसे आचार्य कहते हैं।
 
He who teaches the Vedas consisting of six parts and teaches the Vedic vows and explains the meanings of the mantras is called an Acharya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)