Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.107.d55: जो उपनयन संस्कार करता है और फिर दूसरों को प्रतिदिन कल्प और उनके रहस्यों सहित वेदों का अध्ययन कराता है, उसे उपाध्याय कहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन  »  श्लोक d55
 
 
श्लोक  14.107.d55 
कृत्वोपनयनं वेदान् योऽध्यापयति नित्यश:।
सकल्पान् सरहस्यांश्च स चोपाध्याय उच्यते॥
 
 
अनुवाद
जो उपनयन संस्कार करता है और फिर दूसरों को प्रतिदिन कल्प और उनके रहस्यों सहित वेदों का अध्ययन कराता है, उसे उपाध्याय कहते हैं।
 
He who performs the Upanayan ceremony and then makes others study the Vedas including the Kalpa and their mysteries daily is called Upadhyaya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)