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अष्टौ तान्यव्रतघ्नानि आपो मूलं घृतं पय:।
हविर्ब्राह्मणकाम्या च गुरोर्वचनमौषधम्॥
अनुवाद
जल, मूल, घी, दूध, नैवेद्य, ब्राह्मण की इच्छा पूरी करना, गुरु की आज्ञा का पालन करना तथा औषधि सेवन करना – इन आठों के सेवन से व्रत भंग नहीं होता।
Water, roots, ghee, milk, offerings, fulfilling the wish of a Brahmin, obeying the orders of the Guru and taking medicine – the fast is not broken by consuming these eight.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥