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mahabharat 14.107.d4: यदि कोई रोगी, दुखी, व्यथित और भूखा ब्राह्मण विधिपूर्वक भोजन करता है, तो भी उसे कोई प्रायश्चित नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d4 
आतुरो दु:खितो वापि तथार्तो वा बुभुक्षित:।
भुञ्जन्नविधिना विप्र: प्रायश्चित्तायते न च॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई रोगी, दुखी, व्यथित और भूखा ब्राह्मण विधिपूर्वक भोजन करता है, तो भी उसे कोई प्रायश्चित नहीं होता।
 
If a sick, unhappy, distressed and hungry Brahmin eats food without following the prescribed rituals, then also he does not incur any atonement.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)