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mahabharat 14.107.d37: राजन! यदि ब्राह्मण, देवता, दरिद्र या गुरु का धन चुराया जाए, तो वह स्वर्गवासियों को भी नीचे गिरा देता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d37 
ब्राह्मणस्वं च यद् दैवं दरिद्रस्यैव यद् धनम्।
गुरोश्चापि हृतं राजन् स्वर्गस्थानपि पातयेत्॥
 
 
अनुवाद
राजन! यदि ब्राह्मण, देवता, दरिद्र या गुरु का धन चुराया जाए, तो वह स्वर्गवासियों को भी नीचे गिरा देता है।
 
Rajan! If the wealth of a Brahmin, a deity, a poor man or a Guru is stolen, it brings down even the people of heaven.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)