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mahabharat 14.107.d36: जो मनुष्य 'मत दो' कहकर ब्राह्मण या गाय को भोजन देने से मना कर देता है, वह पशु-पक्षी योनियों में सौ बार जन्म लेता है और अन्त में चाण्डाल बनता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d36 
मा ददात्विति यो ब्रूयाद् ब्राह्मणेषु च गोषु च।
तिर्यग्योनिशतं गत्वा चण्डालेषूपजायते॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य 'मत दो' कहकर ब्राह्मण या गाय को भोजन देने से मना कर देता है, वह पशु-पक्षी योनियों में सौ बार जन्म लेता है और अन्त में चाण्डाल बनता है।
 
He who refuses to give food to a Brahmin or a cow by saying 'don't give', takes birth a hundred times in the form of animals and birds and ultimately becomes a Chandala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)