Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.107.d34: अग्निहोत्री, द्विज, कपिला गाय, यज्ञ करने वाला मनुष्य, राजा, मुनि और समुद्र - इनके दर्शन मात्र से ही मनुष्य पवित्र हो जाता है, अतः इनका सदैव दर्शन करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्निचित्कपिला सत्री राजा भिक्षुर्महोदधि:।
दृष्टमात्रात् पुनन्त्येते तस्मात् पश्येत तान् सदा॥
अनुवाद
अग्निहोत्री, द्विज, कपिला गाय, यज्ञ करने वाला मनुष्य, राजा, मुनि और समुद्र - इनके दर्शन मात्र से ही मनुष्य पवित्र हो जाता है, अतः इनका सदैव दर्शन करना चाहिए।
Agnihotri, Dwija, Kapila cow, a man performing yagya, a king, a monk and the ocean – these purify a person just by seeing them, hence one should always see them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥