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mahabharat 14.107.d32: युधिष्ठिर बोले, "हे प्रभु! आप स्वयं नारायण हैं, आदिदेव हैं तथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के निवास हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। अब मैं सम्पूर्ण धर्मों का सार सुनना चाहता हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d32 
युधिष्ठिर उवाच
नारायण पुराणेश लोकावास नमोऽस्तु ते।
श्रोतुमिच्छामि कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन धर्मसारसमुच्चयम्॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "हे प्रभु! आप स्वयं नारायण हैं, आदिदेव हैं तथा सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के निवास हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। अब मैं सम्पूर्ण धर्मों का सार सुनना चाहता हूँ।"
 
Yudhishthira said, "O Lord! You are Narayana himself, the ancient God and the abode of the entire universe. I salute you. Now I want to listen to the essence of all religions in their entirety."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)