Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.107.d30: जो लोग विषयों की आसक्ति से मुक्त होकर तपस्या में लगे रहते हैं, जिन्होंने प्रतिदिन स्वाध्याय द्वारा अपने शरीर को दुर्बल बना लिया है, जो अपनी इन्द्रियों को वश में रखते हैं और सभी जीवों के कल्याण में लगे रहते हैं, उनके लिए इस लोक के साथ-साथ परलोक का भी सुख सहज ही सुलभ है। | mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो लोग विषयों की आसक्ति से मुक्त होकर तपस्या में लगे रहते हैं, जिन्होंने प्रतिदिन स्वाध्याय द्वारा अपने शरीर को दुर्बल बना लिया है, जो अपनी इन्द्रियों को वश में रखते हैं और सभी जीवों के कल्याण में लगे रहते हैं, उनके लिए इस लोक के साथ-साथ परलोक का भी सुख सहज ही सुलभ है।
Those who are free from attachment to objects and engage in penance, who have weakened their body by daily self-study, who control their senses and are engaged in the welfare of all living beings, for them the happiness of this world as well as that of the next world is easily accessible.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥