Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.107.d29: हे शत्रुसूदन! जिनके पास बहुत सारा धन है और जो परलोक का कुछ भी ज्ञान न होने के कारण सदैव भोग-विलास में लिप्त रहते हैं, वे केवल भौतिक सुखों में ही आसक्त रहते हैं। अतः उन्हें केवल इस लोक के ही सुख सहज ही प्राप्त होते हैं, उन्हें परलोक का सुख कभी प्राप्त नहीं होता।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन  »  श्लोक d29
 
 
श्लोक  14.107.d29 
धनानि येषां विपुलानि सन्ति
नित्यं रमन्ते परलोकमूढा:।
तेषामयं शत्रुवरघ्न लोको
नान्यत् सुखं देहसुखे रतानाम्॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुसूदन! जिनके पास बहुत सारा धन है और जो परलोक का कुछ भी ज्ञान न होने के कारण सदैव भोग-विलास में लिप्त रहते हैं, वे केवल भौतिक सुखों में ही आसक्त रहते हैं। अतः उन्हें केवल इस लोक के ही सुख सहज ही प्राप्त होते हैं, उन्हें परलोक का सुख कभी प्राप्त नहीं होता।
 
O Shatrusudana! Those who have a lot of wealth and who are always indulging in pleasures and luxuries because they do not know anything about the other world, are attached to only physical pleasures. Therefore, only the pleasures of this world are easily available to them; they never get the happiness of the other world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)