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mahabharat 14.107.d23: जो मनुष्य अत्यन्त भूखा होने के कारण भोजन चाहने वाले ब्राह्मणों के भोजन में बाधा डालता है, उससे बड़ा कोई पापी नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d23 
विप्राणां भोक्तुकामानामत्यन्तं चान्नकाङ्क्षिणाम्।
यो विघ्नं कुरुते मर्त्यस्ततो नान्योऽस्ति पापकृत्॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अत्यन्त भूखा होने के कारण भोजन चाहने वाले ब्राह्मणों के भोजन में बाधा डालता है, उससे बड़ा कोई पापी नहीं है।
 
There is no greater sinner than the man who, because he is extremely hungry, interrupts the meal of Brahmins who desire food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)