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mahabharat 14.107.d20: जो श्रेष्ठ ब्राह्मण अनाथ ब्राह्मण के शव को श्मशान तक ले जाता है, उसे प्रत्येक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d20 
अनाथं ब्राह्मणं प्रेतं ये वहन्ति द्विजोत्तमा:।
पदे पदेऽश्वमेधस्य फलं ते प्राप्नुवन्ति हि॥
 
 
अनुवाद
जो श्रेष्ठ ब्राह्मण अनाथ ब्राह्मण के शव को श्मशान तक ले जाता है, उसे प्रत्येक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है।
 
The noble Brahmin who carries the corpse of an orphan Brahmin to the cremation ground, receives the fruits of the Ashwamedha Yagna at every step.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)