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mahabharat 14.107.d19: तीन रात्रि बीत जाने पर मनुष्य को समुद्र में मिलने वाली नदी में स्नान करना चाहिए, सौ बार प्राणायाम करना चाहिए तथा घी पीना चाहिए, तब वह शुद्ध हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d19 
त्रिरात्रे तु तत: पूर्णे नदीं गत्वा समुद्रगाम्।
प्राणायामशतं कृत्वा घृतं प्राश्य विशुद्धॺति॥
 
 
अनुवाद
तीन रात्रि बीत जाने पर मनुष्य को समुद्र में मिलने वाली नदी में स्नान करना चाहिए, सौ बार प्राणायाम करना चाहिए तथा घी पीना चाहिए, तब वह शुद्ध हो जाता है।
 
After the completion of three nights, one should take a bath in a river that flows into the sea, perform Pranayama a hundred times and drink ghee, and then he becomes pure.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)