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mahabharat 14.107.d18: जो ब्राह्मण मूर्खतापूर्वक शूद्र के शव का श्मशान तक पीछा करता है, वह तीन रातों तक अपवित्र रहता है।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d18 
प्रेतभूतं तु य: शूद्रं ब्राह्मणो ज्ञानदुर्बल:।
अनुगच्छेन्नीयमानं त्रिरात्रमशुचिर्भवेत्॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण मूर्खतापूर्वक शूद्र के शव का श्मशान तक पीछा करता है, वह तीन रातों तक अपवित्र रहता है।
 
The Brahmin who foolishly follows the dead body of a Shudra to the cremation ground is subjected to three nights of impurity.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)