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mahabharat 14.107.d16: जो ब्राह्मण प्रतिदिन अग्निहोत्र करने पर भी शूद्र का अन्न खाने से परहेज नहीं करता, उसकी आत्मा, वेदों का अध्ययन और तीन अग्नियाँ - ये पाँचों नष्ट हो जाती हैं।   |   mahabharat अध्याय 14.107: आपद्धर्म, श्रेष्ठ और निन्द्य ब्राह्मण, श्राद्धका उत्तम काल और मानव-धर्म-सारका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.107.d16 
आहिताग्निश्च यो विप्र: शूद्रान्नान्न निवर्तते।
पञ्च तस्य प्रणश्यन्ति आत्मा ब्रह्म त्रयोऽग्नय:॥
 
 
अनुवाद
जो ब्राह्मण प्रतिदिन अग्निहोत्र करने पर भी शूद्र का अन्न खाने से परहेज नहीं करता, उसकी आत्मा, वेदों का अध्ययन और तीन अग्नियाँ - ये पाँचों नष्ट हो जाती हैं।
 
A Brahmin who does not abstain from eating the food of a Shudra despite performing Agnihotra every day, his soul, study of the Vedas and the three Agnis - all these five get destroyed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)