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mahabharat 14.106.d9: राजन! प्राण त्यागते समय स्थिर और सावधान रहो तथा इस प्रकार प्राण त्यागो कि जीभ को स्वाद का भान ही न हो।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d9 
यथा रसं न जानाति जिह्वा प्राणाहुतौ नृप।
तथा समाहित: कुर्यात् प्राणाहुतिमतन्द्रित:॥
 
 
अनुवाद
राजन! प्राण त्यागते समय स्थिर और सावधान रहो तथा इस प्रकार प्राण त्यागो कि जीभ को स्वाद का भान ही न हो।
 
Rajan! While sacrificing one's life, be steady and careful and sacrifice one's life in such a way that the tongue does not become aware of the taste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)