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mahabharat 14.106.d8: फिर मंत्र पढ़कर पांचों आत्माओं को अलग-अलग भोजन कराएं।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d8 
पञ्च प्राणाहुती: कुर्यात् समन्त्रं तु पृथक् पृथक्॥
 
 
अनुवाद
फिर मंत्र पढ़कर पांचों आत्माओं को अलग-अलग भोजन कराएं।
 
Then after reciting the mantra, offer food to the five souls separately.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)