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mahabharat 14.106.d30: तिल अत्यंत पवित्र और पापों का नाश करने वाले होते हैं। इनकी उत्पत्ति भगवान नारायण से हुई है। इसीलिए श्राद्ध में तिलों की अत्यधिक महिमा है और तिलों का दान सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d30 
तिला: पवित्रा: पापघ्ना नारायणसमुद्भवा:।
तिलान् श्राद्धे प्रशंसन्ति दानं चेदमनुत्तमम्॥
 
 
अनुवाद
तिल अत्यंत पवित्र और पापों का नाश करने वाले होते हैं। इनकी उत्पत्ति भगवान नारायण से हुई है। इसीलिए श्राद्ध में तिलों की अत्यधिक महिमा है और तिलों का दान सर्वश्रेष्ठ दान माना गया है।
 
Sesame seeds are very holy and destroy sins. They have originated from Lord Narayana. That is why sesame seeds are highly praised in Shraddha and donation of sesame seeds is considered to be the best donation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)