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mahabharat 14.106.d25: गायों से बेहतर कौन हो सकता है, जिनके गोबर से सभा भवन, तालाब, घर और यहां तक ​​कि मंदिर भी पवित्र हो जाते हैं?   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.106.d25 
सभा प्रपा गृहाश्चापि देवतायतनानि च।
शुद्धॺन्ति शकृता यासां किं भूतमधिकं तत:॥
 
 
अनुवाद
गायों से बेहतर कौन हो सकता है, जिनके गोबर से सभा भवन, तालाब, घर और यहां तक ​​कि मंदिर भी पवित्र हो जाते हैं?
 
Who can be better than the cows, whose dung purifies assembly halls, ponds, houses and even temples?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)