Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 14.106.d11: इसके विपरीत, मूर्ख ब्राह्मण जो भोजन करता है, वह अपने भोजन से केवल राक्षसों, भूतों और शैतानों को ही तृप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 14.106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 106: भोजनकी विधि, गौओंको घास डालनेका विधान और तिलका माहात्म्य तथा ब्राह्मणके लिये तिल और गन्ना पेरनेका निषेध  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  14.106.d11 
अतोऽन्यथा तु भुञ्जानो ब्राह्मणो ज्ञानदुर्बल:।
तेनान्नेनासुरान् प्रेतान् राक्षसांस्तर्पयिष्यति॥
 
 
अनुवाद
इसके विपरीत, मूर्ख ब्राह्मण जो भोजन करता है, वह अपने भोजन से केवल राक्षसों, भूतों और शैतानों को ही तृप्त करता है।
 
On the contrary, a foolish Brahmin who eats food only satisfies the demons, ghosts and devils with his food.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)