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mahabharat 14.104.d8: जो मूर्खतापूर्वक अपने गुरु को 'तू' कहकर पुकारता है, गुर्राकर उनका अपमान करता है तथा उनकी आज्ञा का उल्लंघन करता है और मनमाना आचरण करता है, वह भी ब्रह्महत्यारा कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d8 
गुरुं त्वंकृत्य हुंकृत्य अतिक्रम्य च शासनम्।
वर्तते यस्तु मूढात्मा तमाहुर्ब्रह्मघातकम्॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्खतापूर्वक अपने गुरु को 'तू' कहकर पुकारता है, गुर्राकर उनका अपमान करता है तथा उनकी आज्ञा का उल्लंघन करता है और मनमाना आचरण करता है, वह भी ब्रह्महत्यारा कहलाता है।
 
He who foolishly calls his Guru by saying 'tu', insults him by growling and disobeys his orders and behaves arbitrarily, is also called a killer of Brahman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)