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श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  14.104.d7 
चक्षुषा वापि हीनस्य पङ्गोर्वापि जडस्य वा।
हरेद् वै यस्तु सर्वस्वं तमाहुर्ब्रह्मघातकम्॥
 
 
अनुवाद
जो अंधे, लंगड़े और गूंगे व्यक्ति का सब कुछ छीन लेता है, उसे भी ब्रह्महत्यारा कहा जाता है।
 
He who takes away everything from a blind, lame and dumb person is also called a killer of Brahman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)