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mahabharat 14.104.d5: पृथ्वीनाथ! जो प्यासे गौ समुदाय को पानी तक पहुँचने से रोकता है, उसे भी ब्रह्महत्या (ब्रह्म का हत्यारा) कहा जाता है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d5 
गोकुलस्य तृषार्तस्य जलान्ते वसुधाधिप।
उत्पादयति यो विघ्नं तमाहुर्ब्रह्मघातकम्॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! जो प्यासे गौ समुदाय को पानी तक पहुँचने से रोकता है, उसे भी ब्रह्महत्या (ब्रह्म का हत्यारा) कहा जाता है।
 
Prithvinath! He who obstructs the thirsty cow community from reaching water is also called a Brahmahatya (killer of Brahma).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)