Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.104.d34: जिन्होंने बहुत से जल से भरे हुए सरोवर, धर्मशालाएं, कुएं और सुंदर तालाब बनवाए हैं तथा जो सदैव अन्न दान करते हैं और मधुर वाणी बोलते हैं, उन पर यमराज का कोई वश नहीं चलता। | mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
येषां तडागानि बहूदकानि
सभाश्च कूपाश्च शुभा: प्रपाश्च।
अन्नप्रदानं मधुरा च वाणी
यमस्य ते निर्विषया भवन्ति॥
अनुवाद
जिन्होंने बहुत से जल से भरे हुए सरोवर, धर्मशालाएं, कुएं और सुंदर तालाब बनवाए हैं तथा जो सदैव अन्न दान करते हैं और मधुर वाणी बोलते हैं, उन पर यमराज का कोई वश नहीं चलता।
Those who have built many lakes filled with abundant water, Dharamshalas, wells and beautiful ponds and those who always donate food and speak sweetly, Yamraj has no control over them.
(दाक्षिणात्य प्रतिमें अध्याय समाप्त)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥