Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.104.d28: विद्वान पुरुष को कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए, अपने तप पर अभिमान नहीं करना चाहिए, संकट में होने पर भी ब्राह्मणों का अनादर नहीं करना चाहिए तथा दान का बखान नहीं करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनृतं न वदेद् विद्वांस्तपस्तप्त्वा न विस्मयेत्।
नार्तोऽप्यभिभवेद् विप्रान् न दत्त्वा परिकीर्तयेत्॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष को कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए, अपने तप पर अभिमान नहीं करना चाहिए, संकट में होने पर भी ब्राह्मणों का अनादर नहीं करना चाहिए तथा दान का बखान नहीं करना चाहिए।
A learned man should never tell a lie; he should not take pride in his penance; he should not disrespect Brahmins even when in trouble; and he should not boast about the charity he gives.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥