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mahabharat 14.104.d23: तिलक दान करने वाले को इच्छानुसार संतान की प्राप्ति होती है, दीप दान करने वाले को उत्तम नेत्रों की प्राप्ति होती है, भूमि दान करने वाले को भूमि की प्राप्ति होती है तथा स्वर्ण दान करने वाले को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d23 
तिलदश्च प्रजामिष्टां दीपदश्चक्षुरुत्तमम्।
भूमिदो भूमिमाप्नोति दीर्घमायुर्हिरण्यद:॥
 
 
अनुवाद
तिलक दान करने वाले को इच्छानुसार संतान की प्राप्ति होती है, दीप दान करने वाले को उत्तम नेत्रों की प्राप्ति होती है, भूमि दान करने वाले को भूमि की प्राप्ति होती है तथा स्वर्ण दान करने वाले को दीर्घायु की प्राप्ति होती है।
 
A person who donates tilak gets children as per his wish, a person who donates lamps gets good eyes, a person who donates land gets land and a person who donates gold gets a long life.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)