Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 14.104.d12: क्योंकि इस संसार में अन्न ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जो शक्ति देती है और अन्न के आधार पर ही जीवन टिका हुआ है। महाराज! अब मैं उन लोगों का परिचय दे रहा हूँ जिनका अन्न खाने योग्य नहीं माना जाता, ध्यानपूर्वक सुनिए। | mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन । mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
क्योंकि इस संसार में अन्न ही एकमात्र ऐसी वस्तु है जो शक्ति देती है और अन्न के आधार पर ही जीवन टिका हुआ है। महाराज! अब मैं उन लोगों का परिचय दे रहा हूँ जिनका अन्न खाने योग्य नहीं माना जाता, ध्यानपूर्वक सुनिए।
Because food is the only thing that gives strength in this world and life is sustained on the basis of food. King! Now I am introducing those people whose food is not considered fit for consumption, listen carefully.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥