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mahabharat 14.104.d10: युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु! हमें उस दान के बारे में बताइए जो सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। श्रेष्ठ! उन ब्राह्मणों का परिचय दीजिए जिनका भोजन खाने योग्य नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 14.104: ब्रह्महत्याके समान पापका, अन्नदानकी प्रशंसाका, जिनका अन्न वर्जनीय है उन पापियोंका, दानके फलका और धर्मकी प्रशंसाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  14.104.d10 
युधिष्ठिर उवाच
सर्वेषामपि दानानां यत् तु दानं विशिष्यते।
अभोज्यान्नाश्च ये विप्रास्तान् वदस्व सुरोत्तम॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - हे प्रभु! हमें उस दान के बारे में बताइए जो सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। श्रेष्ठ! उन ब्राह्मणों का परिचय दीजिए जिनका भोजन खाने योग्य नहीं है।
 
Yudhishthir asked – Lord! Tell us about the donation which is considered the best among all donations. Best! Introduce those Brahmins whose food is not edible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)