श्री महाभारत  »  पर्व 14: आश्वमेधिक पर्व  »  अध्याय 101: पञ्चमहायज्ञ, विधिवत् स्नान और उसके अंगभूत कर्म, भगवान‍् के प्रिय पुष्प तथा भगवद्भक्तोंका वर्णन  »  श्लोक d11
 
 
श्लोक  14.101.d11 
युधिष्ठिर उवाच
देवदेवेश दैत्यघ्न त्वद्भक्तस्य जनार्दन।
वक्तुमर्हसि देवेश स्नानस्य च विधिं मम॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा- देवदेव! आप दैत्यों के संहारक और देवताओं के स्वामी हैं। जनार्दन! अपने इस भक्त को स्नान की विधि बताइये।
 
Yudhishthir said-Devdev! You are the destroyer of demons and the lord of gods. Janardan! Tell this devotee of yours the method of bathing.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)