Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d99: उसे केवल धर्मानुसार प्राप्त भोजन ही करना चाहिए। उसे इच्छापूर्वक कुछ भी नहीं खाना चाहिए। चलते समय उसे अपनी दृष्टि दो फुट आगे की ओर रखनी चाहिए और एक दिन में एक कोस से अधिक नहीं चलना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d99
 
 
श्लोक  13.99.d99 
धर्मलब्धं समश्नाति न कामान् किंचिदश्नुते।
युगमात्रदृगध्वानं क्रोशादूर्ध्वं न गच्छति॥
 
 
अनुवाद
उसे केवल धर्मानुसार प्राप्त भोजन ही करना चाहिए। उसे इच्छापूर्वक कुछ भी नहीं खाना चाहिए। चलते समय उसे अपनी दृष्टि दो फुट आगे की ओर रखनी चाहिए और एक दिन में एक कोस से अधिक नहीं चलना चाहिए।
 
He should eat only food obtained as per Dharma. He should not eat anything with desire. While walking, he should keep his eyes on the ground two feet ahead and should not walk more than one kos in a day.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)