Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d90: इस प्रकार शूद्रों को आलस्य से मुक्त होकर संन्यासियों की सेवा करने का प्रयत्न करना चाहिए। उन्हें हर प्रकार की छोटी-बड़ी सेवा करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे संन्यासी संतुष्ट रहें।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d90
 
 
श्लोक  13.99.d90 
एवं प्रयतितव्यं हि शुश्रूषार्थमतन्द्रितै:॥
सर्वाभिरुपसेवाभिस्तुष्यन्ति यतयो यथा।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शूद्रों को आलस्य से मुक्त होकर संन्यासियों की सेवा करने का प्रयत्न करना चाहिए। उन्हें हर प्रकार की छोटी-बड़ी सेवा करने का प्रयास करना चाहिए, जिससे संन्यासी संतुष्ट रहें।
 
In this way, Shudras should be free from laziness and should strive to serve the Sannyasis. They should try to do all kinds of small and big services so that the Sannyasis remain satisfied.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)