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mahabharat 13.99.d84: यदि कोई भिखारी बीमार भी हो तो उसे भीख मांगनी चाहिए, किसी विद्वान वैद्य के पास जाकर रोग निवारण के लिए उपयुक्त शुद्ध औषधियां एकत्रित करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d84
 
 
श्लोक  13.99.d84 
भिक्षाटनोऽभिगच्छेत भिषजश्च विपश्चित:।
ततो विनिष्क्रियार्थानि द्रव्याणि समुपार्जयेत्॥
 
 
अनुवाद
यदि कोई भिखारी बीमार भी हो तो उसे भीख मांगनी चाहिए, किसी विद्वान वैद्य के पास जाकर रोग निवारण के लिए उपयुक्त शुद्ध औषधियां एकत्रित करनी चाहिए।
 
Even if a beggar is ill, he should go for alms. He should visit a learned physician and collect pure medicines suitable for curing a disease.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)