Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d82: उसे अपने गद्दी, मृगचर्म और भिक्षापात्र की भी देखभाल करनी चाहिए तथा अपनी रुचि के अनुसार सभी कार्य करने चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d82
 
 
श्लोक  13.99.d82 
दर्भाजिनान्यवेक्षेत भैक्षभाजनमेव च॥
यथाकामं च कार्याणि सर्वाण्येवोपसाधयेत्।
 
 
अनुवाद
उसे अपने गद्दी, मृगचर्म और भिक्षापात्र की भी देखभाल करनी चाहिए तथा अपनी रुचि के अनुसार सभी कार्य करने चाहिए।
 
He should also take care of his cushion, deerskin and alms bowl and do all the work according to his liking.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)