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mahabharat 13.99.d81: जो भिक्षु यात्रा के कारण थके हुए हैं और बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी ऐसे कठिन समय में विशेष देखभाल और अनुशासन के साथ सेवा की जानी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d81
 
 
श्लोक  13.99.d81 
अध्वना कर्शितानां च व्याधितानां तथैव च॥
शुश्रूषां नियत: कुर्यात् तेषामापदि यत्नत:।
 
 
अनुवाद
जो भिक्षु यात्रा के कारण थके हुए हैं और बीमारी से पीड़ित हैं, उनकी ऐसे कठिन समय में विशेष देखभाल और अनुशासन के साथ सेवा की जानी चाहिए।
 
Those monks who are tired and suffering from illness due to travelling, should be served with special care and discipline during such difficult times.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)