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mahabharat 13.99.d80: इसलिए शूद्र को अपने मन को नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए और तपस्वियों की सेवा करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d80
 
 
श्लोक  13.99.d80 
तस्मात् प्रयत्नत: सेव्या भिक्षवो नियतात्मना।
 
 
अनुवाद
इसलिए शूद्र को अपने मन को नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए और तपस्वियों की सेवा करनी चाहिए।
 
Therefore, a Shudra should try to control his mind and serve the ascetics.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)