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mahabharat 13.99.d79: यदि शूद्र भी उसी मार्ग का अनुसरण करे और उसी प्रकार के पुरुष का उपयोग करे, तो संगति के कारण वह शीघ्र ही वैसा ही बन जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d79
 
 
श्लोक  13.99.d79 
शूद्रोऽप्येतेन मार्गेण यादृशं सेवते जनम्।
तादृग् भवति संसर्गादचिरेण न संशय:॥
 
 
अनुवाद
यदि शूद्र भी उसी मार्ग का अनुसरण करे और उसी प्रकार के पुरुष का उपयोग करे, तो संगति के कारण वह शीघ्र ही वैसा ही बन जाता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
If a Sudra also follows the same path and uses the same kind of man, then due to association he soon becomes like that, there is no doubt about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)