Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.99.d74: मुझे विशेष रूप से उन प्रबुद्ध और सदाचारी संन्यासियों की सेवा करनी चाहिए, जो अपने मन को वश में रखते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d74
 
 
श्लोक  13.99.d74 
भिक्षूणां गतरागाणां केवलं ज्ञानदर्शिनाम्।
विशेषेण मया कार्या शुश्रूषा नियतात्मना॥
 
 
अनुवाद
मुझे विशेष रूप से उन प्रबुद्ध और सदाचारी संन्यासियों की सेवा करनी चाहिए, जो अपने मन को वश में रखते हैं।
 
I should especially serve those who are enlightened and virtuous sannyasis, keeping their mind under control.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)