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mahabharat 13.99.d69: संन्यासियों या आश्रम में किसी अन्य को बताए बिना, प्रतिदिन नियमित रूप से उठें, आश्रम के फर्श पर झाड़ू लगाएं और प्लास्टर करें।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d69
 
 
श्लोक  13.99.d69 
अनुक्त्वा तेषु चोत्थाय नित्यमेव यतव्रत:।
सम्मार्जनमथो कृत्वा कृत्वा चाप्युपलेपनम्॥
 
 
अनुवाद
संन्यासियों या आश्रम में किसी अन्य को बताए बिना, प्रतिदिन नियमित रूप से उठें, आश्रम के फर्श पर झाड़ू लगाएं और प्लास्टर करें।
 
Without telling the Sanyasis or anyone else in the ashram, get up regularly every day, sweep and plaster the floor of the ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)