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mahabharat 13.99.d51: वेद और स्मृति के अनुसार सुसंस्कृत पुरुष जो भी कर्तव्य बताता है, उसे असमर्थ पुरुष को करना चाहिए। यही उसके लिए धर्म बताया गया है।   |   mahabharat अध्याय 13.99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 99: सेवासे शूद्रोंकी परम गति, शौचाचार, सदाचार तथा वर्णधर्मका कथन एवं संन्यासियोंके धर्मोंका वर्णन और उससे उनको परम गतिकी प्राप्ति  »  श्लोक d51
 
 
श्लोक  13.99.d51 
यच्चोपदिश्यते शिष्टै: श्रुतिस्मृतिविधानत:।
तथाऽऽस्थेयमशक्तेन स धर्म इति निश्चित:॥
 
 
अनुवाद
वेद और स्मृति के अनुसार सुसंस्कृत पुरुष जो भी कर्तव्य बताता है, उसे असमर्थ पुरुष को करना चाहिए। यही उसके लिए धर्म बताया गया है।
 
Whatever duty a cultured person preaches as per the Vedas and Smritis, an incapable person should perform that. That is the religion prescribed for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)